29 दिसंबर 2016

सपने

उसे रात सपने नहीं दिखाती थी एक तलब जगाती थी कुछ करने की, वह रात मे सोचता था क्या किया सही और क्या गलत... रोज़ एक नए रेजोल्यूशन बनाता और रोज़ उन्हे तोड़ देता लेकिन खुद कभी नहीं टूटा। ज़िन्दगी से उसे कोई शिकवे नहीं थे अब और ना ही कोई नई अभिलाषा या महत्वाकांक्षा, विश वाले खत पर जब उसके विश के लिखने की बारी आई तो उसके पास कुछ था ही नहीं मांगने को, सब तो था उसके पास, जीने रहने और खाने के लिए माकूल पैसे कमा लेता था, घर पर भी थोड़ा बहुत भेज देता था, और कुछ ना बचाते हुए भी खुश रहता था। हर रात नए सपने बुनता बिना सोए और सुबह होते ही सपनों को तकिये के पास रखकर करीने से सजा देता, ऐसा करते करते लाखों सपने इकठ्ठे हो गए थे, उसके पास अब जगह नहीं बची थी सपनों को और रखने के लिए लेकिन सपने बुनना भी जरूरी था। उसने एक रास्ता ढूंढा और सपनों को छांँटना शुरु किया, जो सपना पूरा नहीं हुआ था उन्हे फिर से बुनने लगा, लेकिन अब सपने उसके साथ चलने लगे, जीवन की खुशी काफूर होने लगी, खुशियां सपनों के धागे बनने लगीं, वह अब रात मे जब खिड़की के बाहर देखता तो हर तरफ शोर चलता हुआ दिखता और अधूरे सपने उस शोर को और बढ़ाते रहते, खुशियों की लगातार कमी के चलते सपनों ने विद्रोह कर दिया था.....अधूरे सपने दुखी होने लगे थे और जगह जगह से फटने लगे थे वह रोज उस सपने मे पैबंद लगाता जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती, देखते देखते बाकी सपने गुमने लगे, तकिये के पास फिर जगह बन गयी थी और पैबंद लगे सपनों को वह खिड़की पर टांग देता, सपने रात भर शोर से मिलकर साजिश रचते हैं और वह एक नई पैबंद किसी जरूरी सपने मे लगाता है, उसकी खुशियां जल्द ही आएंगी वापस, बहुत जल्द वह सपनों को खाली कर देगा और धागे बचाएगा....... इतने सपने नहीं बुनेगा कि पैबंद की जरूरत पड़े। उसने खुद से वादा किया है..... वह खुशियों के सपने देखेगा क्यूंकि सिर्फ वही सपने धागे बनाते हैं।
टूटा वह अब भी नहीं है..... वह एक दिन एक घर बनाएगा, बड़ा सा घर और फिर ढेर सारे सपने बुनेगा, और उन्हे करीने से सजाएगा. उतने बड़े घर मे सपने ज्यादा नहीं होंगे, पैबंद की जरूरत नहीं पड़ेगी और ना ही सपने छाँटने की.... वह खूब धागे बचाएगा, खूब धागे और अगली बार विश मांगने वाले खत पर एक विश जरूर लिखेगा।

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