15 जनवरी 2012

पानी ने सांकल लगा दी


रात आँखों में गुजरी भी न थी,
कि सुबह हो गई ...
स्वप्नों ने डेरा अभी जमाया ही था...
की बहते पानी ने सांकल लगा दी...
-नीरज