आवारा
15 जनवरी 2012
पानी ने सांकल लगा दी
रात आँखों में गुजरी भी न थी,
कि सुबह हो गई ...
स्वप्नों ने डेरा अभी जमाया ही था...
की बहते पानी ने सांकल लगा दी...
-नीरज
2 टिप्पणियां:
Madan Mohan Saxena
4 जनवरी 2013 को 5:20 pm बजे
बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर
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Niraj Pal
7 जनवरी 2013 को 8:53 am बजे
आभार मदन जी।
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बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर
जवाब देंहटाएंआभार मदन जी।
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