कुछ बातें,
रह गयीं,
कुछ अरमान जागने से पहले ही खो गए,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
एक जमी हुई नदी,
जलती हुई सी बुझती आग,
खिले हुए मुरझाये से फूल हैं,
बुझी हुई शमा से रोशन हुआ जहाँ है,
देखो तो सब कुछ है,
न देखो तो हर शय,
खोया हुआ अफसाना है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
जमे हुए पानी में ज़िन्दगी है,
साँस लेती हुई मरती सी ज़िंदगानी है,
बंद रास्तों में भी,
सोया हुआ प्रकाश है,
गुमशुदा शहर में अब भी मेरी पहचान है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
- नीरज
रह गयीं,
कुछ अरमान जागने से पहले ही खो गए,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
एक जमी हुई नदी,
जलती हुई सी बुझती आग,
खिले हुए मुरझाये से फूल हैं,
बुझी हुई शमा से रोशन हुआ जहाँ है,
देखो तो सब कुछ है,
न देखो तो हर शय,
खोया हुआ अफसाना है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
जमे हुए पानी में ज़िन्दगी है,
साँस लेती हुई मरती सी ज़िंदगानी है,
बंद रास्तों में भी,
सोया हुआ प्रकाश है,
गुमशुदा शहर में अब भी मेरी पहचान है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
- नीरज