कुछ बातें,
रह गयीं,
कुछ अरमान जागने से पहले ही खो गए,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
एक जमी हुई नदी,
जलती हुई सी बुझती आग,
खिले हुए मुरझाये से फूल हैं,
बुझी हुई शमा से रोशन हुआ जहाँ है,
देखो तो सब कुछ है,
न देखो तो हर शय,
खोया हुआ अफसाना है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
जमे हुए पानी में ज़िन्दगी है,
साँस लेती हुई मरती सी ज़िंदगानी है,
बंद रास्तों में भी,
सोया हुआ प्रकाश है,
गुमशुदा शहर में अब भी मेरी पहचान है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
- नीरज
रह गयीं,
कुछ अरमान जागने से पहले ही खो गए,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
एक जमी हुई नदी,
जलती हुई सी बुझती आग,
खिले हुए मुरझाये से फूल हैं,
बुझी हुई शमा से रोशन हुआ जहाँ है,
देखो तो सब कुछ है,
न देखो तो हर शय,
खोया हुआ अफसाना है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
जमे हुए पानी में ज़िन्दगी है,
साँस लेती हुई मरती सी ज़िंदगानी है,
बंद रास्तों में भी,
सोया हुआ प्रकाश है,
गुमशुदा शहर में अब भी मेरी पहचान है,
उल्फत की ज़िन्दगी है,
तन्हाई मेरा अफसाना।।
- नीरज
आँख बन्द कर तनिक सोचता हूँ तो अकेला हो जाता हूँ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार प्रवीण जी।
हटाएंअकेले होना भी एक प्रयास है, आँख बंद करना इतना आसान कहाँ होता है?
हटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-12-2013) "जिन पे असर नहीं होता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1475 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!
हार्दिक आभार।
हटाएंतन्हाई ही तो अपना है .....
जवाब देंहटाएंनई पोस्ट मेरे सपनो के रामराज्य (भाग तीन -अन्तिम भाग)
नई पोस्ट ईशु का जन्म !
हार्दिक आभार कालीपद जी।
हटाएंबढ़िया रचना
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार।
हटाएंबहुत ही बेहतरीन रचना...
जवाब देंहटाएं:-)
http://mauryareena.blogspot.in/
हार्दिक आभार रीना जी।
हटाएंहार्दिक आभार राजीव जी। इधर ब्लॉग पे आ नहीं पा रहा हूँ, इसलिए क्षमाप्रार्थी हूँ।
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